“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
धीमे बहते पानी का दर्द
कुछ पानी इतना धीमा बहता है
कि लगता है जैसे समय ठहर गया हो।
ऐसे पानी में
यादें तैरती नहीं—
बस बैठ जाती हैं तल में
रेत की तरह।
और फिर कोई भी कदम
उन्हें हिला देता है
जैसे कोई पुराना ज़ख़्म
फिर से खुल गया हो।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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