होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Wednesday, 29 April 2026

धीमे बहते पानी का दर्द

 धीमे बहते पानी का दर्द

कुछ पानी इतना धीमा बहता है

कि लगता है जैसे समय ठहर गया हो।


ऐसे पानी में

यादें तैरती नहीं—

बस बैठ जाती हैं तल में

रेत की तरह।


और फिर कोई भी कदम

उन्हें हिला देता है

जैसे कोई पुराना ज़ख़्म

फिर से खुल गया हो।


मुकेश ,,,,,,,,,,

No comments:

Post a Comment