पानी में लिखी इबारतें
किसने कहा कि पानी लिख नहीं सकता?
हर नदी
हर झरना
हर बूंद
एक अधूरी लिखावट है।
बस फर्क इतना है
कि यहाँ स्याही नहीं होती
यहाँ यादें होती हैं।
और यादों का सबसे बड़ा सच यह है
वे मिटती नहीं,
बस रूप बदल लेती हैं।
कभी लहर,
कभी झाग,
कभी बस एक स्वाद
जो जीभ पर नहीं
आत्मा पर रह जाता है।
मुकेश ,,,,,,,,,
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