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Tuesday, 28 April 2026

तुमने कदम रखा, और समय ने हल्की-सी चूक की

 यह वही क्षण था—या कम-से-कम वैसा ही।

तुमने कदम रखा, और समय ने हल्की-सी चूक की—जैसे वह अपने ही क्रम को पहचानने में एक पल देर कर गया हो।

तुमने इधर-उधर देखा।
सब कुछ पहली बार की तरह था—और ठीक उसी वजह से असहज।

एक राहगीर गुज़रा—
उसकी चाल, उसका कंधा झुकाने का ढंग,
यहाँ तक कि उसके जूते की आवाज़—
तुम्हें पहले से मालूम थी।

“यह पहले हो चुका है।”
तुमने भीतर कहा—या किसी ने तुम्हारे भीतर कह दिया।

तुमने उस वाक्य को पकड़ना चाहा,
पर वह तुम्हारे हाथ में आते ही बदल गया—
जैसे कोई स्मृति, जो वर्तमान का रूप धरकर तुम्हें धोखा दे रही हो।

“क्या यह सचमुच दोहराव है?”
इस बार तुमने सीधे उससे पूछा—
जो हर बार उत्तर देने से थोड़ा पहले चुप हो जाता है।

“या तुम वही देख रहे हो,
जो तुम देखना चाहते हो?”
उसने बिना ठहराव के लौटाया।

तुम्हें लगा—यह केवल पहचान का खेल नहीं है।
यह कुछ और है—कुछ ऐसा,
जो तुम्हारे अनुभव और समय के बीच की दरार में घट रहा है।

तुमने ध्यान से देखना शुरू किया।
इस बार हर चीज़ को—
उसकी सूक्ष्म भिन्नताओं के साथ।

वही रास्ता—
पर इस बार धूल का रंग थोड़ा गहरा था।
वही पेड़—
पर उसकी एक शाखा सूख चुकी थी।
वही हवा—
पर उसमें एक हल्की-सी ठंडक जुड़ गई थी।

“तो फिर यह वही नहीं है,”
तुमने धीरे से कहा—
“यह केवल वैसा लगता है।”

वह—जो तुम्हारे साथ था—
इस बार जैसे थोड़ा पास आ गया।

“तुम्हारी चेतना पैटर्न बनाती है,”
उसने कहा—
“और जब कोई नया क्षण पुराने ढाँचे में फिट हो जाता है,
तो तुम्हें लगता है कि तुमने उसे पहले जिया है।”

तुमने इस उत्तर को सुना—
पर पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।

क्योंकि अनुभव केवल तर्क से नहीं बनता।
उसमें एक हल्की-सी रहस्य की परत भी होती है,
जो हर व्याख्या के बाद भी बची रह जाती है।

तुम कुछ देर रुके।
इस बार इसलिए नहीं कि कदम थम गए—
बल्कि इसलिए कि तुमने उन्हें थाम लिया।

तुमने आँखें बंद कीं।
और उस क्षण को भीतर से महसूस किया—
बिना यह तय किए कि वह नया है या पुराना।

और अचानक—
वह ‘पहले हो चुका’ वाला एहसास
धीरे-धीरे घुलने लगा।

जैसे तुमने उसे पहचानने के बजाय
उसे होने दिया हो।

तुमने आँखें खोलीं।
दुनिया वैसी ही थी
पर अब उसमें कोई दोहराव नहीं था।

तुमने समझा
कि शायद ‘déjà vu’ समय की गलती नहीं,
तुम्हारी पकड़ की आदत है।

जब तुम हर क्षण को
पहचान के नाम से बाँधना छोड़ देते हो

तो वह पहली बार ही रहता है।

हर बार।

मुकेश ,,,,,,,,,,,,,

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