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Thursday, 30 April 2026

दायरे के भीतर प्रेम

 “दायरे के भीतर प्रेम”


नीरस स्त्री से प्रेम हो जाए तो

तुम्हें सबसे पहले

अपने ही आग्रहों की आवाज़ कम करनी पड़ती है।


क्योंकि उसके भीतर

रोमांस कोई उत्सव नहीं—

एक नियंत्रित ऊर्जा है,

जिसे वह

बहुत सावधानी से खर्च करती है।


वो तुम्हें पास आने देती है,

पर उतना ही

जितना उसके भीतर की व्यवस्था

बिखरे नहीं।


उसके लिए स्पर्श

सिर्फ़ स्पर्श नहीं—

एक मनोवैज्ञानिक प्रवेश है,

जहाँ हर इंच के साथ

उसका विश्वास भी दाँव पर होता है।


इसलिए

वो हर क्षण को नापती है—

तुम्हारी नज़र, तुम्हारी आवाज़,

तुम्हारे शब्दों की तह तक जाती है,

जैसे प्रेम नहीं,

कोई परीक्षण चल रहा हो।


तुम्हें लगेगा—

वो कंजूस है भावों में,

पर सच यह है—

वो अपव्यय से डरती है।


वो जानती है

कि एक बार बहा दिया गया भाव

वापस नहीं आता,

और जो लौटता है—

वो अक्सर पछतावा होता है।


कभी-कभी

वो मान भी जाती है—

तुम्हारे करीब,

तुम्हारे इतने पास

कि तुम्हारी साँसें

उसकी त्वचा को छूने लगें—


पर ठीक उसी क्षण

वो एक अदृश्य रेखा खींच देती है,

और तुम

अपने ही अधूरेपन में

रुक जाते हो।


जैसे होंठों तक आया प्याला

अचानक ठहर जाए—

और प्यास

तुम्हारी समझ में बदलने लगे।


वो तुम्हें रोकती नहीं,

बस अपने दायरे का बोध करा देती है—

और यही

उसका सबसे सूक्ष्म नियंत्रण है।


उसके भीतर

प्रेम एक जोखिम है,

और रोमांस—

एक संभावित विघटन।


इसलिए

वो तुम्हें पूरी तरह नहीं चाहती,

बल्कि

इतना चाहती है

कि खुद को खोए बिना

तुम्हारे साथ रह सके।


नीरस स्त्री से प्रेम करना

दरअसल

उसकी सीमाओं का सम्मान करना है—

और यह समझना भी

कि हर प्यास बुझाना ज़रूरी नहीं,

कुछ प्यासें

मनुष्य को गहरा बनाती हैं।


मुकेश ,,,,,,,,,

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