प्रेम : नीरस स्त्री बनाम चंचल स्त्री

 प्रेम : नीरस स्त्री बनाम चंचल स्त्री


अगर आपको प्रेम में

झरने सा उछलना और बह जाना पसंद है

तो नीरस स्त्री से प्रेम न करें।

अगर आपको

लंबे आलिंगन और ठहरते हुए चुंबन चाहिए—

तो नीरस स्त्री से प्रेम न करें।

अगर आपको हर दिन

“मिस यू” और “लव यू” सुनना जरूरी लगता है—

तो नीरस स्त्री से प्रेम न करें।

अगर आपको

भावनाओं का खुला प्रदर्शन,

भीड़ में हाथ थाम लेना अच्छा लगता है—

तो नीरस स्त्री से प्रेम न करें।

अगर आपको

तुरंत जवाब, तुरंत प्रतिक्रिया चाहिए—

तो नीरस स्त्री से प्रेम न करें।

अगर आपको

प्रेम में उत्सव, शोर और आवेग चाहिए—

तो नीरस स्त्री से प्रेम न करें।

क्योंकि नीरस स्त्री—

प्रेम को बहाती नहीं,

संभाल कर रखती है…

और वहाँ

उत्साह कम,

गहराई ज़्यादा होती है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है