कुछ चीज़ें लौटकर नहीं आतीं
कुछ चीज़ें लौटकर नहीं आतीं एक उम्र के बाद आदमी को यह समझ में आने लगता है कि जीवन में सबसे बड़ी सच्चाई परिवर्तन नहीं, अपूर्ण वापसी है। बहुत-सी चीज़ें लौटती तो हैं, मगर वैसी नहीं लौटतीं जैसी गई थीं। बारिश लौटती है, लेकिन बचपन वाली बारिश नहीं। घर लौटते हैं, लेकिन उनमें रहने वाले लोग बदल चुके होते हैं। पुरानी गलियाँ वहीं रहती हैं, मगर उन्हें देखने वाली आँखें वैसी नहीं रहतीं। और कभी-कभी हम ख़ुद भी लौटते हैं—किसी शहर में, किसी स्मृति में, किसी रिश्ते में—लेकिन वहाँ पहुँचकर पता चलता है कि जिस जगह को हम खोज रहे थे, वह अब केवल हमारे भीतर मौजूद है। मुझे याद है, एक बार वर्षों बाद मैं एक पुराने मोहल्ले से गुज़रा था। सड़क वही थी। पेड़ भी लगभग वही थे। कुछ मकान रंग बदल चुके थे, कुछ गिराकर नए बना दिए गए थे। मैं बहुत देर तक वहाँ खड़ा रहा, जैसे किसी परिचित चेहरे में पुराने आदमी को तलाश रहा हूँ। फिर अचानक समझ में आया कि बदलाव मोहल्ले में नहीं, मुझमें हुआ है। जिसे मैं खोज रहा था, वह दरअसल वह समय था जो वहाँ कभी गुज़रा था। और समय किसी पते पर नहीं रहता। वह सिर्फ़ स्मृति में रहता है। शाय...