जो लोग हमारे भीतर रह जाते हैं
कभी-कभी जीवन में कुछ लोग ऐसे आते हैं जिनके साथ कोई बड़ी कहानी नहीं बनती। न प्रेम का कोई घोषित अध्याय, न रिश्ते का कोई नाम। वे आते हैं, कुछ समय हमारे आसपास रहते हैं और फिर चले जाते हैं। लेकिन अजीब बात यह है कि उनके जाने के बाद भी उनका जाना पूरा नहीं होता। उनका एक हिस्सा हमारे भीतर कहीं रह जाता है।
मैं अक्सर सोचता हूँ कि स्मृतियाँ भी कितनी चयनशील होती हैं। उन्हें बड़ी घटनाओं से उतना लगाव नहीं होता जितना छोटी बातों से। एक शाम की धूप, किसी के हाथों की हरकत, बात करते हुए अचानक छा जाने वाली ख़ामोशी—यही सब तो वर्षों बाद भी याद रह जाता है।
शायद इसलिए कि जीवन अपने बड़े अर्थों में नहीं, इन्हीं छोटे क्षणों में हमारे सामने खुलता है।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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