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Tuesday, 31 March 2026

ईश्वर का लॉग-आउट

 “ईश्वर का लॉग-आउट”

एक दिन

अचानक


कोई चमत्कार नहीं हुआ,

कोई आवाज़ नहीं आई,


बस

बहुत चुपचाप

ईश्वर

लॉग-आउट हो गया।


न आसमान टूटा,

न धरती फटी


सब कुछ

वैसा ही रहा,


बस

प्रार्थनाएँ

कहीं पहुँचनी बंद हो गईं।


मंदिरों में

घंटियाँ बजती रहीं,


मस्जिदों में

अज़ान होती रही,


पर

उनके बीच

जो खाली जगह थी


वह

पहले से ज़्यादा

खाली हो गई।


लोगों ने कहा


“शायद

सर्वर डाउन है…”


उन्होंने

और ज़ोर से

प्रार्थना की,


और बड़े-बड़े

अनुष्ठान किए,


पर

कोई “रिस्पॉन्स” नहीं आया।


धीरे-धीरे

खबर फैल गई


कि

ईश्वर

अब “ऑनलाइन” नहीं है।


कुछ लोग डर गए,

कुछ

और भी निर्दयी हो गए


क्योंकि

अब उन्हें लगा

कोई देख नहीं रहा।


पर

एक अजीब-सी बात हुई


सन्नाटे में

कुछ और

धीरे-धीरे सुनाई देने लगा।


वह

मनुष्य की अपनी आवाज़ थी


जिसे

वह

सालों से

ईश्वर समझता आया था।


एक बूढ़ा

आसमान की ओर देखता है


और कहता है


“अगर तू चला गया है…

तो अब

हम क्या करें?”


आसमान

चुप रहता है


पर

हवा के एक हल्के झोंके में

जैसे

कोई जवाब छुपा हो


“अब

तुम खुद

ईश्वर बनो…”


लोग

पहले हँसे


फिर

धीरे-धीरे

डरने लगे


क्योंकि

ईश्वर होना

आसान नहीं था।


इसका मतलब था


कि अब

हर अन्याय

उनकी ज़िम्मेदारी है,


हर पीड़ा

उनका बोझ है,


और

हर प्रेम

उनका चुनाव।


कोई

मंदिर से बाहर आया,


और पहली बार

किसी भूखे को

रोटी दी


बिना किसी डर के,

बिना किसी फल की इच्छा के।


वहीं

किसी ने

एक पेड़ लगाया


जैसे

वह प्रार्थना कर रहा हो।


और

किसी ने

किसी को

गले लगा लिया


जैसे

वह पूजा कर रहा हो।


शायद

ईश्वर

गया नहीं था


उसने

बस

अपना अकाउंट

मनुष्यों में ट्रांसफर कर दिया था।


और

अब

हर दिल में

एक छोटा-सा नोटिफिकेशन था

“You are now the admin.”

मुकेश ,,,,,,,

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