दर्शन भाग–3 : चार्वाक दर्शन के मूल सूत्र, प्राथमिक स्रोत एवं ग्रंथों का आलोचनात्मक अध्ययन
दर्शन भाग –3 : चार्वाक दर्शन के मूल सूत्र , प्राथमिक स्रोत एवं ग्रंथों का आलोचनात्मक अध्ययन किसी भी दर्शन को समझने का सबसे विश्वसनीय मार्ग उसके मूल ग्रंथ (Primary Sources) होते हैं। वे हमें यह बताते हैं कि उस दर्शन के प्रवर्तकों ने स्वयं क्या कहा था। परन्तु चार्वाक दर्शन के अध्ययन में सबसे बड़ी कठिनाई यही है कि उसका कोई भी मूल ग्रंथ पूर्ण रूप में आज उपलब्ध नहीं है। इस कारण चार्वाक दर्शन का पुनर्निर्माण विभिन्न दार्शनिक ग्रंथों में उद्धृत सूत्रों , विरोधी मतों द्वारा प्रस्तुत विवरणों तथा आधुनिक विद्वानों के आलोचनात्मक अध्ययन के आधार पर किया जाता है। इस भाग का उद्देश्य चार्वाक दर्शन के उपलब्ध स्रोतों का प्रामाणिक परिचय देना तथा यह स्पष्ट करना है कि कौन - सा स्रोत प्राथमिक है , कौन - सा द्वितीयक , और उनकी ऐतिहासिक विश्वसनीयता कितनी है। क्या चार्वाक का कोई मूल ग्रंथ उपलब्ध है ? इस प्रश्न का संक्षिप्त उत्तर है — नहीं। आज तक चार्वाक ...