दूसरा दिन लॉक डाउन का दूसरा दिन ---------------------------------------

जो
अपने घरों में
राशन - पानी पर्याप्त मात्रा में भर चुके हैं
वे संपन्न लोग खुश हैं फिलहाल
उनके लिए लॉक डाउन एक उत्सव सा बन के आया है
महिलाऐं नए नए पकवान बना रही हैं
छोटे बच्चे टी वी में मस्त हैं
किशोर मोबाइल पे
पुरुष कभी न्यूज़ पे तो कभी
आस पड़ोस में मित्रों से बहस  का रस ले रहे
बूढ़े अपनी बीमारी को ले थोड़ा चिंतित ज़रूर हैं
पर बच्चों को सामने देख संतुष्ट हैं

चिंतित हैं
परेशां हैं तो सिर्फ
रस्ते में फंसे मुसाफिर
गरीब जिनके पास खाने को नहीं
या डॉक्टर - पुलिस व सुरक्षा कर्मी
सर्कार के बड़े नेता व अफसर

उधर
विषाणु  इटली / जापान / अमेरिका समेत
लगभग आधी से ज़्यादा दुनिया में
लाशों के ढेर लगा के
लाखों को मौत के नज़दीक ला के
राक्षस का अट्ठहास कर रहा है
जिसकी दस्तक भारत में भी
हर क्षण बढ़ती जा रही है

यहाँ भी क्या कहर बरसाएगा
कहा नहीं जा सकता
फिर भी कुछ बुद्धिजीवियों / समझदारों / दूरदर्शियों
को छोड़ सब के लिए लॉक डाउन एक सामान्य कर्फ्यू से
ज़्यादा नहीं लग रहा

हे ईश्वर ! रहम करना
सब की रक्षा करना

मुकेश इलाहाबादी -----------------

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