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Thursday, 19 February 2026

प्रेम : वैकल्पिक विषय

 जीवन के पाठ्यक्रम में

प्रेम अनिवार्य नहीं रखा गया

कोई भी चाहे

तो इसे छोड़ सकता है।


मुख्य विषय हैं

रोटी, रोज़गार, प्रतिष्ठा,

उत्तरदायित्व की ठोस परिभाषाएँ।

प्रेम बस एक विकल्प है—

जिसके आगे लिखा है

“इच्छानुसार चुनें।”


कक्षा में बैठे कई लोग

उसे देखे बिना

आगे बढ़ जाते हैं।

उन्हें भय है—

इस विषय में

प्रश्नपत्र तय नहीं होते,

अंक-प्रणाली पारदर्शी नहीं,

और परिणाम

अक्सर घोषित ही नहीं किए जाते।


प्रेम का पाठ्यक्रम

अजीब है

यहाँ सिद्धांत कम,

अनुभव अधिक है।

यहाँ असफलता भी

उपाधि बन सकती है।


जो इसे चुन लेते हैं,

वे जानते हैं

रातें लंबी होंगी,

आत्मालाप कठिन होगा,

और कई बार

उत्तर पुस्तिका

आँसुओं से भीग जाएगी।


पर वे यह भी जानते हैं

इसी विषय में

सबसे अधिक प्रकाश है।


क्योंकि प्रेम

भले वैकल्पिक हो,

जीवन की डिग्री पर

उसकी अनुपस्थिति

साफ़ पढ़ी जाती है।


और अंततः

जब अंतिम घंटी बजती है,

तो वही लोग मुस्कुराते दिखते हैं

जिन्होंने यह जोखिम उठाया था।


प्रेम सचमुच

वैकल्पिक विषय है

पर जो इसे नहीं पढ़ते,

वे अक्सर

जीवन का मुख्य पाठ

अधूरा छोड़ देते हैं।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,

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