मै नदी के बारे में सोचता हूँ

मै
नदी के बारे में
सोचता हूँ
मेरे अंदर एक
नदी बहने लगती है
मै बादलों के बारे में
सोचता हूँ
मेरे अंदर
कुछ रिमझिम - रिमझिम सा
बरसने लगता है
मै फूल के बारे में सोचता हूँ
मेरे अंदर कुछ खिलने
और महकने लगता है
मै
तुम्हारे बारे में सोचता हूँ
मेरे अंदर नदी बहने लगती है
बादल बरसने लगता है
एक फूल खिलने और
महकने लगता है
कहीं तुम
पूरी की पूरी पृकृति तो नहीं हो ??
क्यूँ ?? मेरी सुमी,
मुकेश इलाहाबादी ---------

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