कभी झरने सा बहते हो
कभी झरने सा बहते हो तो कभी बादल सा बरसते हो
तन बदन भिगो देते हो जब भी मुस्कुराते हो हँसते हो
यूँ तो तुमसे बात करो तो बातों का खज़ाना रखते हो
बात मुहब्बत की आये तो मुस्कुराते हो चुप रहते हो
जब भी मिलते हो सारे जहाँ की खबर सुनाते हो तुम
तुम्हारे दिल में क्या है बस यही बात छुपाये रखते हो
मुकेश इलाहाबादी -------------------------------
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