ये
जो दूरियां रहीं
वजह
मजबूरियां रही
जो दूरियां रहीं
वजह
मजबूरियां रही
जुबाँ
खामोश रही
बोलती
चुप्पियां रही
खामोश रही
बोलती
चुप्पियां रही
दिलों
के बीच
बर्फ़ की
सिल्लिययां रही
शायरी
मेरी
दर्द की
खूटियां रही
मेरी
दर्द की
खूटियां रही
मुकेश इलाहाबादी,,,
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