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Wednesday, 18 February 2026

ये जो दूरियां रहीं

ये
जो दूरियां रहीं
वजह
मजबूरियां रही
जुबाँ
खामोश रही
बोलती
चुप्पियां रही

दिलों
के बीच
बर्फ़ की
सिल्लिययां रही
शायरी
मेरी
दर्द की
खूटियां रही
मुकेश इलाहाबादी,,,

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