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Thursday, 19 February 2026

ख़ामोशी का बयान जारी है

 अदालत सजी हुई है,

लफ़्ज़ अपनी-अपनी कुर्सियों पर बैठे हैं,

दलीलें काग़ज़ों में करवट ले रही हैं,

मगर मेरी तरफ़ से

ख़ामोशी का बयान जारी है।


मैंने सोचा था

कुछ कहूँगा,

दिल की तह में जमा

सारे इकरार और इनकार

एक-एक कर सामने रख दूँगा।

मगर जैसे ही

होंठ खुले,

आवाज़ ने खुद को वापस बुला लिया।


ख़ामोशी ने कहा,

हर सच का शोर ज़रूरी नहीं,

कुछ एहसास

बयान से पहले ही मुकम्मल होते हैं।


मैंने देखा,

धड़कनें गवाही दे रही थीं,

नज़र अपनी जगह स्थिर थी,

और रूह

एक अजीब सुकून में डूबी थी।


यह जो चुप्पी है,

यह डर नहीं,

न शिकस्त का इक़रार,

यह तो वह लहजा है

जिसमें दिल

बिना अल्फ़ाज़ के बोलता है।


कभी-कभी

सबसे गहरी मोहब्बत

बिना दावा किए रहती है,

सबसे सच्चा एतराज़

बिना आवाज़ उठाए दर्ज होता है।


इसलिए

मैंने लफ़्ज़ों को रुख़्सत कर दिया,

और ख़ामोशी को

माइक पर छोड़ दिया।


अब जो सुनना चाहे

वह धड़कनों की तरफ़ झुके,

वहाँ

एक लंबा बयान चल रहा है,

जिसका हर वाक्य

साँसों से लिखा जा रहा है।


और जब तक

दिल यूँ ही बोलता रहेगा,

ख़ामोशी का बयान

जारी रहेगा।


मुक़ेश,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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