छठी रात का चाँद और तुम
छठी रात का चाँद उग आया है,
पूरा, चमकदार, और अपनी पूरी रौशनी फैलाता हुआ।
रात की ठंडक अब हल्की हो चली है,
और हवाएँ भी अपने गीत में मीठी हो चली हैं।
तुम वहाँ हो,
जैसे चाँद की हर किरण में छुपा कोई मुस्कुराता एहसास।
पूरा दिखने वाला चाँद अब कुछ कहता है—
जैसे तुम्हारी आँखों की चमक हर रोशनी से आगे हो।
यह रात बताती है
कि पूर्णता के करीब हर चीज़ और भी सुंदर लगती है।
कि हर पल, हर छाया, और हर रोशनी
हमारे भीतर के एहसास को जाग्रत करती है।
तुम मेरी रात की सबसे उजली रोशनी हो,
जो हर अधूरी ख्वाहिश को पूरा करती है।
और छठी रात का चाँद,
जैसे तुम्हारे होने की पुष्टि करता हो,
हर अँधेरे को हरा कर
मुझे सिर्फ तुम्हारे करीब लाता हो।
छठी रात का चाँद और तुम
दोनों ही पूरी तरह मौजूद,
दोनों ही अद्भुत,
और दोनों ही मुझे यही सिखाते हैं—
कि प्रेम और एहसास की पूर्णता
बस महसूस करने में ही है।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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