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Friday, 20 February 2026

चाँद की पांचवी रात और तुम

 चाँद की पांचवी रात और तुम


पाँचवी रात का चाँद,

धीरे-धीरे अपनी पूरी रौशनी बिखेर रहा है।

रात अब पहले जैसी गहरी नहीं,

और अँधेरा भी अपनी चादर को ढीला कर रहा है।


तुम वहाँ हो,

जैसे चाँद की बढ़ती किरणों में बसती कोई मुस्कान।

पूरी चमक अभी नहीं,

पर हर किरण में तुम्हारा एहसास इतना स्पष्ट है कि

दिल को छू जाता है।


यह रात बताती है

कि बदलाव की मिठास भी अपने भीतर पूर्णता लिए होती है।

कि हर अधूरी चीज़ भी सुंदर हो सकती है,

और हर इंतज़ार में खुशी छिपी होती है।


तुम मेरी हर रात की बढ़ती रौशनी हो,

हर खामोशी में गीत बनाती हुई,

हर पल मेरे भीतर उतरती हुई।

और चाँद की यह पांचवी रात,

जैसे तुम्हारे होने की एक झलक दिखा रही हो।


चाँद की यह बढ़ती रौशनी

और तुम्हारा एहसास

दोनों ही मुझे याद दिलाते हैं

कि पूर्णता सिर्फ़ मंज़िल में नहीं,

रास्ते में भी महसूस की जाती है।


पाँचवी रात का चाँद और तुम

जैसे रात की आधी कहानी और मेरे दिल की पूरी दुनिया।

और मैं हर पल तुम्हें महसूस करता हूँ,

हर किरण में तुम्हें देखता हूँ,

और हर सांस में तुम्हें अपने पास पाता हूँ।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,

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