तुम्हारी हँसी
जब खुलती है
तो लगता है
आसमान ने पीला उजाला
झरना शुरू कर दिया हो।
अमलतास की लंबी-लंबी लड़ियाँ
धूप से भरकर
झूम उठती हैं,
और हवा
उनमें छुपा संगीत
धीरे-धीरे बिखेरती है।
तुम हँसती हो
तो कोई ऋतु बदल जाती है
सूनी सड़क पर
अचानक रंग उतर आते हैं,
और पेड़ों की थकी शाखों में
नई धड़कन भर जाती है।
अमलतास की बारिश
तेज़ नहीं होती,
वह चुपचाप गिरती है
जैसे तुम्हारी मुस्कान
बिना शोर के
दिल पर उतरती है।
हर पीली पंखुड़ी
एक उजला लम्हा है,
जो गिरकर भी
मुरझाता नहीं—
बस ज़मीन को
थोड़ा और रोशन कर देता है।
मैंने देखा है,
जब तुम खिलखिलाती हो,
तो धूप का रंग
और गाढ़ा हो जाता है
जैसे किसी ने
दिन के माथे पर
सोने की बिंदी सजा दी हो।
अमलतास की यह बारिश
भीगाती नहीं,
बस भर देती है
आँखों में हल्की चमक,
हथेलियों में नरम गर्मी,
और भीतर
एक अनकही मिठास।
तुम्हारी हँसी
शायद कोई आवाज़ नहीं,
एक उजाला है
जो गिरता है,
बिखरता है,
और फिर भी
हर बार
नई तरह से खिल उठता है।
और मैं
उस पीली बारिश के नीचे खड़ा
बस इतना जानता हूँ,
कि कुछ लोग
मौसम नहीं होते,
वे अमलतास होते हैं
जिनकी हँसी से
पूरा आकाश
एक साथ झरने लगता है।
मुकेश ,,,,
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