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Wednesday, 18 February 2026

तुम और तुम्हारा वैनिटी बैग

तुम और तुम्हारा वैनिटी बैग,

दोनों में कुछ बातें चुप हैं,

जैसे सूरज की रौशनी और उसकी परछाईं।


बैग में नेल पोलिश के रंग,

हर शेड जैसे तुम्हारी अलग-लग ख़्वाहिशें,

जो शब्दों में कह नहीं पाती।


आई-ब्रो की छोटी बोतल,

कंघी की हल्की ठंडक,

जैसे तुम अपनी पहचान को सँवारती हो,

हर लहर, हर बाल में अपनी कहानी लिखती हो।


कुछ चिल्लर, कुछ नोट,

डेबिट / क्रेडिट कार्ड, शायद कभी इस्तेमाल नहीं हुए,

लेकिन उनमें तुम्हारी छुपी हुई उम्मीदें और छोटी-छोटी योजनाएँ हैं।


पुरानी खरीदारी के कैश मेमो,

कुछ तुड़ी-मुड़ी पर्चियाँ,

सिरदर्द की दवाइयाँ,

सब तुम्हारे भीतर की ज़िन्दगी के छोटे-छोटे संकेत हैं।


और सबसे खास, बैग की एक छोटी-सी चोर-जेब में

कुछ प्रेम-पत्रियाँ,

कुछ झुर्रीदार, कुछ नए स्याही के धब्बों से रंगे,

जैसे तुम्हारे दिल की छुपी आवाज़ें,

जो किसी को सुनाने के लिए नहीं,

सिर्फ़ खुद के लिए लिखी गई हैं।


जब तुम इसे खोलती हो,

तो लगता है जैसे तुम्हारा पूरा जहान

एक छोटे से पिटारे में समाया हो

ख़ुशी, ग़म, मजबूरी, और इज्जत की सारी कहानियाँ,

और साथ में तुम्हारे छुपे हुए प्यार के राज़,

जो सिर्फ़ तुम्हारे बैग के पन्नों में सांस लेते हैं।


तुम और तुम्हारा वैनिटी बैग,

दोनों में छुपा है तुम्हारा रहस्य,

एक असली तुम जो दुनिया से कह नहीं पाती,

लेकिन अपने छोटे-छोटे पन्नों, रंगों, वस्तुओं और प्रेम-पत्रियों के ज़रिए

धीरे-धीरे अपने आपको ज़ाहिर करती है।


मुकेश ,,,,

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