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Thursday, 19 February 2026

रेत् के नीचे नदी --- भाग आठ

 रेत् के नीचे नदी --- भाग आठ 

कहानी में सूत्रधार और नाइका यानी यमी की मुलाकात  की एक और शाम 

(स्थान और समय आप तय कर लें )

नदी आज कुछ गुनगुनाती हुई सी बह रही है.

सूत्रधार पास बिक रह लड़के से कागज़ के दो कोन में चने मुरमुरे ले आया है,

नाईका अपने कोन से एक एक दाना टूंगती हुई 

- तुम कह रहे थे तुम मेरे लिए एक कहानी लिख रहे हो 

- हाँ 

- क्या लिखोगे उसमे ?? (शांत और संयत किन्तु हलकी मुस्कुराहट के साथ )

 (सूत्रधार उत्साह से नाईका की आँखों में झांकते हुए अपने वाक्यों को तारतम्य देता है )

- कहनी में लिखूंगा तुम्हारी ये गहरी आँखे  

  तुम्हारी ये सांवली किन्तु भरी भरी स्मूथ बाहें 

  तुम्हारी सादगी 

  तुम्हारी संजीदगी 

  तुम्हारी होंठो की ये रहस्यात्मक मुस्कान 

 - और कुछ (हल्की हँसी )

-  और लिखूंगा तुम्हारे प्रेम के बारे में 

   उस प्रेमी के बारे में जिसे तुमने चाहा होगा जी जान से 

- हूँ, पर मै चाहती हूँ तुम इन सबके पहले लिखो 

  मेरे पिता के बारे में 

  मेरे पिता जो मेरे लिए आसमान थे नीला - नीला और बेहद विस्तृत अनंतता लिए हुए 

  लिखो तुम मेरे पिता के बारे में जो स्वाभाव में तो सूरज सा दहकते थे 

  पर वो आग जिसने हम भाई बहनो को जीवन दिया 

  लिखो पिता की उस आग के बारे में जिसे अपने सीने में दबाए दबाये खुद ख़ाक होते रहे 

  पर हम भाई बहनो  के लिए जीवन की सर्द रातों में गर्म लिहाफ सा रहे 

  लिखो तुम मेरे पिता के बारे में जिन्होंने संघर्ष करना सिखाया 

  लिखो मेरे पिता के बारे में जिन्होंने कठिन से कठिन परिस्तिथियों में भी रह के अपने संस्कारों 

  और आदर्शों को नहीं छोड़ा 

  लिखो तुम मेरे पिता के बारे में सब कुछ लिखो और बहुत कुछ लिखो 

  क्यों कि तुम जब तक मेरे पिता के बारे में नहीं लिखोगे 

  तुम मेरे बारे में नहीं लिख पाओगे 

  वैसे भी तुम्हारे लिए तो अब मै "यमी" हूँ न ?

  यमी यानी यमुना जो मृत्यु के देवता यमराज की बहन है और सूर्य की पुत्री है 

  इस लिए भी तुम्हे मेरे बारे में लिखने के पहले लिखना होगा 

  मेरे पिता के बारे में 

 और मेरे पिता तुल्य बड़े भाई के बारे में 

 क्या लिख पाओगे ये सब तुम 

 अगर हाँ - तो ही लिखना मेरे बारे में 

 वर्ण कहानी को यहीं समाप्त कर दो - शुरू होने के पहले ही 

(एक साँस में नाइका इतना कुछ बोल गयी जो उसकी आदत नहीं थी )

सूत्रधार हतप्रभ है सुन के 

शांत 

बिलकुल चुप 

कुछ देर की लम्बी चुप्पी 

फिर कुछ गहरी सोच के बाद सूत्रधार 

- तुम सही कह रही हो 

  स्त्री सिर्फ अपने प्रेमी से ही प्रेम नहीं करती 

  स्त्री अपने प्रेमी से प्रेम करने के पहले प्रेम करती है 

  अपने पिता से 

  अपने भाई से अपने परिवार से 

  अपने आदर्शों और सिद्धांतो से 

  जो उसके लिए मुख्य होते हैं 

  कम से कम भारतीय स्त्री के लिए तो ये बात बहुत हद तक सही कही जा सकती है 

  इस लिए मै लिखूंगा जैसा तुम चाहोगी 

(नाईका सूत्रधार की बातों से प्रभावित और खुश नज़र  आती है )

- अब तुम ही इस कहनी को सूत्र थामो और आगे बढ़ाओ 

  मै तो सिर्फ कहानी के सूत्र को पकड़ के आगे और आगे बढ़ता जाऊँगा 

- क्यूँ ठीक है न ?? (सूत्रधार मुस्कुराता है )

नाईका खुश और शांत है 

दोनों पात्रों के मुरमुरे ख़त्म हो चुके हैं 

और शायद शाम भी चूक चुकी है 

दूर  एक फाख्ता चिड़िया - अपने पंख फड़फड़ा के आसमान में उड़ जाती है 

दूर  एक माझी अपनी अपनी पतवार को लहरों में डाल हिलोरें देता हुआ आगे बढ़ जाता है 

कुछ गुनगुनाता हुआ 

और दूर सूरज भी डूब चूका होता है 

दोनों पात्र उसी दिन की तरह कुछ दूर एक साथ जा कर अपनी अपनी दिशा को हो लेते हैं 

मुकेश इलाहाबादी ------------


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