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Thursday, 19 February 2026

ये जो उम्र के साथ - साथ

 सुनो

ये जो उम्र के साथ - साथ
तुम्हारे व्यक्तित्व में
अनुभव
विचारों व भावों में
प्रौढ़ता आती जा रही है
वो तुम्हारे जिस्म के
बढ़ते हुए वज़न के साथ
घुल मिल कर
एक ऐसा जादूई
मिक्सचर बना रही है
जिसके नशे में
हर कोइ झूमने लगता है
जो भी तुमसे मिलता है
रियली,
ये जो करीने और सलीके से
तुम जो साड़ी बांधती हो न
उसमे से कमर के आस पास से
बदन की मांसलता और चिकना पन
जब झाँकता है न
तो आसमान में चमकती हुई बिजली भी
लजा कर आसमान में या तो वापस चली जाती है
या फिर किसी जंगल या अंधेरी रात में कूद कर
खुद को ख़त्म कर लेती है
इतना ही नहीं
तुम्हारी सांवली त्वचा की चमक
और चेहरे को सलोना पन
मुस्कराहट के साथ
हौले हौले झाँकता है
तो सच
उसमे की शरारत
शराफत
नज़ाकत
किसी की भी जान ले लेने के लिए काफ़ी होती है
सच
उम्र के साथ साथ तुम्हारी इस बढ़ती हुई
सादगी
समझदारी
के हम ही नहीं
ज़माना क़ायल है
अगर मेरी नहीं माननी तो
किसी और से भी पूछ कर देख लेना
और अगर किसी पे विश्वास न हो तो
आईना देख लेना
मुकेश इलाहाबादी ----

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