ये
जो तुम न,
सजने के नाम पे
ट्रेडिशनल हेयर स्टाइल में
एक चोटी को नार्मल या थोड़े से
फैशनेबल कलचर से बांध कर
आईने के सामने अपनी
सामान्य से थोड़ी बड़ी आँखों
को थोड़ा सा फैला कर पलकों के नीचे
हल्की सी काजल की रेख दे कर
हलके पाउडर से चेहरे पे पफिंग
सादे शेड की लिपस्टिक
लगा कर
भौहों के बीच छोटी सी जो बिंदी टांक कर
बाहर निकलती हो न अपने सादे और सुरुचि पूर्ण कपड़ों
में समान्यतः साड़ी या फिर
सलवार कुर्ते में
सच तब ऐसा लगता है
मानो
किसी शायर की सादगी से लबरेज़
ग़ज़ल अपने सफर में गुनगुनाने को निकल दी हो
(सच सुमी तुसी ग्रेट हो - अन मैचेबले )
मुकेश इलाहाबादी ----------
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