जब कभी
तुम
उदास हो कर
अपनी हथेली से
अपने चेहरे को ढंप लेती हो
तब
चाँद को ग्रहण लग जाता है
सूरज भी ग़मगीन हो कर
समंदर में डूब जाता है
और जंगल के सारे जुगनू भी
छुप जाते हैं
और तब
रात रोती है
सुबुक सुबक कर
और ढेर सारे आँसू बिखर जाते हैं
सुबह के आँचल में
इस लिए तुम उदास हो कर
अपनी हथेलियों से चेहरे को मत ढांकना
क्यूँ कि तुम्हारे उदास होने से
सारी क़ायनात उदास हो जाती हैं
मुकेश इलाहाबादी --------------
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