फूटकर नोट्स
1 .
आज भी,
सुबो जीता
शाम मरता हूँ
तेरे दीदार को
तरसता हूँ
2.
तुमने कहा
"बात नहीं होती "
तुम व्यस्त रहती हो
और मै
चुप रहता हूँ
3.
जिस ढाबे पे
हम चाय पीते थे
वहां मॉल खुल गया है
इस लिए अब मैं घर पे ही
चाय पी लिया करता हूँ
4.
तुमने कहा था
मै आलसी और फूहड़ तरीके से रहता हूँ
पहले सोचा था
कुछ सलीका सीख लूँगा (तुमसे )
पर तुम्हारे जाने के बाद
ये वायदा भी मुल्तवी कर दिया
और भी बहुत से ज़रूरी कामो की तरह
5.
आज कल दाढ़ी बहुत बढ़ गयी
खुजाने में मज़ा आता है
और वक़्त भी कट जाता है ,,
6.
अब तुम भी ऑन लाइन कम आते हो
और मैंने भी लिखना कम कर दिया है
मुकेश इलाहाबादी , .,,,,,,,,,,,,,,,,
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