म्यूट किए हुए रिश्ते
कुछ रिश्ते
अब बोलते नहीं
बस ऑनलाइन दिखते हैं,
हरी बत्ती-से जलते हुए,
पर आवाज़ उनकी कहीं दबा दी गई है।
न कोई झगड़ा,
न कोई विदाई,
बस धीरे-धीरे
बातों की धूप कम हुई
और चुप्पियों की शाम गहराती चली गई।
हमने एक-दूसरे को
ब्लॉक नहीं किया,
बस दिल की सेटिंग में
“म्यूट” का बटन दबा दिया
कि न शिकायत सुनाई दे,
न उम्मीद की घंटी बजे।
वे रिश्ते अब भी हैं
त्योहारों पर एक औपचारिक-सा संदेश,
जन्मदिन पर दो इमोजी,
और कभी-कभी
पुरानी तस्वीरों पर ठहरी हुई नज़र।
म्यूट किए हुए रिश्ते
मरते नहीं,
बस धड़कनों के पीछे
धीमे सुर में बजते रहते हैं—
जैसे दूर किसी कमरे में
कोई रेडियो पुराना गीत चला रहा हो।
कभी-कभी
रात के सन्नाटे में
उनकी नोटिफ़िकेशन-सी याद
अचानक चमक उठती है
और हम घबराकर
फिर से साइलेंट कर देते हैं
अपना ही मन।
कितना अजीब है
आवाज़ें बंद कर देने से
अर्थ नहीं मरते।
रिश्ते “अनरीड” नहीं होते,
वे बस
अधूरी बातचीत की तरह
हमारी आत्मा में
ड्राफ़्ट बनकर पड़े रहते हैं।
मुकेश ,,,,,,,,,,,
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