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Wednesday, 18 February 2026

मैं बिट्टो… और मुझे बस रोना आता है”

 

मैं बिट्टो।
मैं अभी छोटी हूँ—
इतनी कि मेरी चोटी भी
अम्मा खुद बनाती हैं।
पर दुख
मेरे हिस्से ज़्यादा आ जाते हैं।
आज छुटका बहुत रोया,
अम्मा काम पर थीं,
मैंने उसे चुप कराया,
पर खुद रोने लगी।
किसी ने देखा नहीं।
बाबू आए
थके हुए,
अम्मा बोली—
“आज पैसे कम मिले।”
मैंने रोटी का छोटा टुकड़ा
छुपकर अपने से पहले
छुटके को दे दिया।
मेरा पेट गड़गड़ाया,
पर मैंने चुप रहना सीखा है।
पप्पू फिर रास्ते में मिला,
अजीब-सी नज़र से देख रहा था।
मैं डर गई।
गाँव में छोटी लड़कियाँ
ज्यादा बोल नहीं पातीं।
रात को चाँद को देखकर
मैंने सोचा—
क्या मेरे लिए भी
कहीं थोड़ी-सी खुश्की रखी है?
मैं बिट्टो…
छोटी हूँ,
पर दर्द
मेरे उम्र से बड़ा है।
मुकेश्,,,

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