अमावस का चाँद और तुम
अमावस की रात है,
अँधेरा इतना गहरा कि ख्याल भी डरते हैं,
सड़कों पर छाया का खेल चलता है,
और हवाएँ कुछ कहती हुई गुजरती हैं।
चाँद अपनी चाँदनी खो चुका है,
सितारे भी जैसे अपनी चुप्पी में कहीं गुम हो गए हैं।
और मैं,
तुम्हारी याद में,
उस अदृश्य रोशनी की तलाश करता हूँ,
जो न दिखे, फिर भी महसूस होती हो।
तुम मेरे भीतर की गहराई हो,
जैसे नदी की धारा, जो जमीन के नीचे बहती है,
शोर नहीं करती,
फिर भी सब कुछ जीवन देती है।
मैंने सोचा, शायद अमावस में सब कुछ अदृश्य हो जाता है,
पर तुम्हारी मौजूदगी ने मुझे सिखाया
अदृश्य होना भी किसी की आँखों में चमक हो सकता है।
रात की हर ठंडी हवा,
तुम्हारे स्पर्श की तरह है,
हर सुनसान गलियों की खामोशी,
तुम्हारी बातों की तरह।
और मैं,
हर अंधेरे को तुम्हारी याद से रोशन करता हूँ,
हर खोई हुई खुशी को तुम्हारे ख्याल में ढूँढता हूँ।
तुम वो चुप्पी हो,
जिसमें मेरी सारी दुवाएँ समाई हुई हैं,
तुम वो गीत हो,
जिसे मैं बार-बार अपने दिल के भीतर गाता हूँ।
और अमावस का चाँद,
वो तुम्हारा परछाई जैसा है—
दिखता नहीं, पर साथ हर पल है।
हर पल मैं तुम्हें ढूँढता हूँ—
सड़क की टिमटिमाती बत्तियों में,
खिड़की के शीशों पर पड़ते सन्नाटों में,
और उस हर सांस में, जो तुम्हारे नाम से सजती है।
तुम्हारी याद में मेरी रातें लंबी हैं,
पर अब डर नहीं लगता।
क्योंकि अमावस की गहराई में भी
तुम एक चुपचाप, पर चमकते चाँद की तरह मौजूद हो।
और मैं,
हर रात तुम्हें महसूस करता हूँ,
हर अँधेरे को अपनी आँखों में तुम्हारे रंग से भरता हूँ।
अमावस का चाँद और तुम—
दोनो ही अदृश्य,
पर मेरी पूरी दुनिया में सबसे हक़ीक़त।
मुकेश ,,,,,,,,,,,
अमावस की रात है,
अँधेरा इतना गहरा कि ख्याल भी डरते हैं,
सड़कों पर छाया का खेल चलता है,
और हवाएँ कुछ कहती हुई गुजरती हैं।
चाँद अपनी चाँदनी खो चुका है,
सितारे भी जैसे अपनी चुप्पी में कहीं गुम हो गए हैं।
और मैं,
तुम्हारी याद में,
उस अदृश्य रोशनी की तलाश करता हूँ,
जो न दिखे, फिर भी महसूस होती हो।
तुम मेरे भीतर की गहराई हो,
जैसे नदी की धारा, जो जमीन के नीचे बहती है,
शोर नहीं करती,
फिर भी सब कुछ जीवन देती है।
मैंने सोचा, शायद अमावस में सब कुछ अदृश्य हो जाता है,
पर तुम्हारी मौजूदगी ने मुझे सिखाया
अदृश्य होना भी किसी की आँखों में चमक हो सकता है।
रात की हर ठंडी हवा,
तुम्हारे स्पर्श की तरह है,
हर सुनसान गलियों की खामोशी,
तुम्हारी बातों की तरह।
और मैं,
हर अंधेरे को तुम्हारी याद से रोशन करता हूँ,
हर खोई हुई खुशी को तुम्हारे ख्याल में ढूँढता हूँ।
तुम वो चुप्पी हो,
जिसमें मेरी सारी दुवाएँ समाई हुई हैं,
तुम वो गीत हो,
जिसे मैं बार-बार अपने दिल के भीतर गाता हूँ।
और अमावस का चाँद,
वो तुम्हारा परछाई जैसा है—
दिखता नहीं, पर साथ हर पल है।
हर पल मैं तुम्हें ढूँढता हूँ—
सड़क की टिमटिमाती बत्तियों में,
खिड़की के शीशों पर पड़ते सन्नाटों में,
और उस हर सांस में, जो तुम्हारे नाम से सजती है।
तुम्हारी याद में मेरी रातें लंबी हैं,
पर अब डर नहीं लगता।
क्योंकि अमावस की गहराई में भी
तुम एक चुपचाप, पर चमकते चाँद की तरह मौजूद हो।
और मैं,
हर रात तुम्हें महसूस करता हूँ,
हर अँधेरे को अपनी आँखों में तुम्हारे रंग से भरता हूँ।
अमावस का चाँद और तुम—
दोनो ही अदृश्य,
पर मेरी पूरी दुनिया में सबसे हक़ीक़त।
मुकेश ,,,,,,,,,,,
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