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हुस्न है, नजाकत है, तन्हाई है
हुस्न है, नजाकत है, तन्हाई है
तूने भी क्या क्या दौलत पाई है
रात है, तीरगी है और तन्हाई हैं
हमने भी कुछ दौलत कमाई हैं
मुहब्बत करके देख लिया हमने,
फक्त दुनिया भरकी जगहसाई हैं
मुकेश इलाहाबादी ---------------
नजाकत को समझो नजर न छुपाओ
ReplyDeleteनजाकत से दिल के नजरों में उतारो
उतर भी गए तो नजकात से छुलो
नजाकत से दिलों में जगह तो बनाओ
@Bhadaniji, bahut khoob...
ReplyDeleteSHABAD NAHI HEN
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