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पहचान छुपा कर आ जाओ
पहचान छुपा कर आ जाओ
नक़ाब पहन कर आ जाओ
गर बादल सा उड़ना है तो
क़फ़स तोड़ कर आ जाओ
ज़माना तो मिलने न देगा
कोई बहाना कर आ जाओ
हुआ है मौसम आशिकाना
दोस्त समझ कर आ जाओ
तुम ख़फ़ा खफा क्यूँ बैठे हो
गुस्सा थूक कर आ जाओ
मुकेश इलाहाबादी -------
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