होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Monday, 1 December 2014

खून भी अब पानी हो गया

खून भी अब पानी हो गया
हर रिश्ता बेमानी हो गया
ये प्यार मुहब्बत झूठी बाते
ईश्क भी जिस्मानी हो गया
दो दिन बादल क्या बरसे,
ज़मी का रंग धानी हो गया
तूने अपनी चुनरी लहरायी
फ़लक आसमानी हो गया
महफिल मे तेरे आने से ही
माहौल शादमानी हो गया
कल तक था जो अजनबी
आज जिन्दगानी हो गया
मुकेश इलाहाबादी ---------------

No comments:

Post a Comment