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Monday, 7 December 2015

देह गंध

जब भी
मेरे नथुनो से,
टकराती है
तुम्हारी
महुए सी देह गंध
सच, तब
मै और भी
बौरा जाता हूँ 

और खो जाती है
तन मन की,
सुध - बुध

(सुमी से )
मुकेश इलाहाबादी ----

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