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Sunday, 22 February 2026

उनसके लिए 15 नन्हीं नज़्में

 उनसके लिए 15 नन्हीं नज़्में 


उसकी आँखों में झाँकना

जैसे दो समंदर देखना,

जिनका पानी कभी सूखता नहीं।


वो मुझे छोड़कर नहीं गई,

बस मेरे हर मौसम से अलग हो गई।


कभी-कभी ख़ामोशी भी

इतनी बोलती है कि शब्द थक जाते हैं।


मैंने मोहब्बत को छुआ नहीं,

बस उसे सांस की तरह जी लिया।


कुछ लोग नाम नहीं होते,

बस दुआ की तरह होते हैं—

हमेशा साथ, हमेशा चुप।


उसके साथ गुज़ारे लम्हे

समय की जेब में रखे सिक्कों जैसे हैं—

चाहे खर्च न करूँ, चमकते रहते हैं।


कभी वो ख़्वाबों में मिलती है,

कभी ख़यालों में,

और कभी—

बस एक आह में।


वो छूती है

तो लगता है जैसे किसी ने

मेरे भीतर की सर्दियों में आग जला दी हो।


हर मोहब्बत पहली होती है,

चाहे वो आख़िरी ही क्यों न हो।


कुछ चेहरे बारिश के बाद की मिट्टी जैसे होते हैं,

बस एक बार सूँघ लो,

और सारी यादें लौट आती हैं।


वो मेरी आँखों में अपना घर बना चुकी है,

इसलिए मैं आँसू तक रोक कर रखता हूँ।


मैंने चाँद को कभी पूरा नहीं चाहा,

क्योंकि उसकी कमी ही उसे ख़ूबसूरत बनाती है।


तुम्हारा नाम

मेरी रूह की सबसे गहरी तह में लिखा है—

वो जगह, जहाँ वक़्त भी नहीं पहुँच सकता।


कुछ मोहब्बतें ख़त्म नहीं होतीं,

बस उम्र के साथ ख़ामोश हो जाती हैं।


वो मेरी दुआ का जवाब नहीं,

वो तो खुद मेरी दुआ है।


मुकेश ,,,,,,,,,

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