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Sunday, 22 February 2026

उसका हर रूप

 उसका हर रूप


एक

जब वो नाराज़ होती है,

उसे मनाने को जी करता है,



दो

जब वो चुप रहती है,

मन करता है उसे गुदगुदाकर हँसा दूँ,


तीन

जब वो सो रही होती है,

उसे देखते रहने का मन करता है,


चार

जब वो रील्स में गुम होती है,

पीछे से बाँहों में भर लेने का जी चाहता है,


पाँच

जब वो कुछ नहीं कर रही होती,

बिना वजह झगड़ने का मन करता है,


— मुकेश

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