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Sunday, 22 February 2026

अधूरी मोहब्बत की पूरी सज़ा

 अधूरी मोहब्बत की पूरी सज़ा

अधूरी मोहब्बत

वो ख्वाब जो कभी पूरे नहीं हुए,

वो शब्द जो कभी बोले नहीं गए,

और वो मुस्कान जो कभी हमारी नहीं बनी।

सज़ा उसकी है,

जो हर रात में हमें अकेला छोड़ देती है,

हर सुबह में अधूरी यादें छोड़ जाती है।

कभी लगता है

सज़ा सिर्फ़ वक़्त की है,

कभी लगता है

सज़ा हमारी अपनी उम्मीदों की है।

हम उसे भूलने की कोशिश करते हैं,

पर हर कदम पर

वो अधूरी मोहब्बत हमें झकझोरती है,

हँसी में भी, चुप्पी में भी,

हर साँस में, हर ख्वाब में।

और हम समझते हैं

कभी अधूरी मोहब्बत पूरी नहीं होती,

बस उसकी सज़ा ही

पूरा हो जाता है,

हमारे भीतर।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,

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