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Saturday, 21 February 2026

डेटा पैक ख़त्म होने पर आई तन्हाई

 डेटा पैक ख़त्म होने पर आई तन्हाई


आज अचानक

नेट चला गया

और कमरे में

एक अजीब-सी खामोशी उतर आई।


कोई नोटिफ़िकेशन नहीं,

कोई नीली टिक नहीं,

कोई स्टेटस नहीं

जिसे देख कर

अपने होने का भ्रम पाल सकूँ।


मोबाइल की स्क्रीन

अब आईना हो गई है

उसमें मेरा चेहरा है,

पर पीछे

कोई हलचल नहीं।


डेटा पैक ख़त्म होते ही

रिश्तों की आवाजाही रुक गई

जैसे शहर की सारी सड़कें

एक साथ सुनसान हो जाएँ।


तब समझ आया—

तन्हाई हमेशा से यहीं थी,

बस मेगाबाइट्स की भीड़ में

दिखाई नहीं देती थी।


अब

सिग्नल की जगह

धड़कनों की रेंज देखनी है,

और नेटवर्क की जगह

अपनी ही सांसों से जुड़ना है।


शायद

डेटा का खत्म होना

एक छोटी-सी तपस्या है

जहाँ बाहर की दुनिया

ऑफ़लाइन होती है,

और भीतर का आदमी

पहली बार

ऑनलाइन।


मुकेश ,,,,,,,,,,,

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