Pages

Wednesday, 18 February 2026

छत पे धूप सेंकती युवती

 छत पे धूप सेंकती युवती,

सूरज की सुनहरी किरणों में लिपटी,

अपनी उँगलियों से धीरे-धीरे बालों को संवारती,

और सिर झुकाए, कहीं खोई,

कुछ सोच रही है,

शायद उस पहली मोहब्बत की हल्की-हल्की धड़कनों के बारे में।


धूप उसके बदन पर गिरती है,

जैसे हर किरण उसकी ताजगी और नई उमंग में घुल रही हो।

कई बार वह नज़रें उठाती है,

छत की सीमाओं से बाहर देखते हुए,

जैसे उसकी आँखें उड़ते हुए जहाज़ को पकड़ना चाहती हों,

या हवा में लहराती पतंग की तरह

कहीं दूर उड़ जाने की तमन्ना रखती हों।


वह देखती है बिजली के तार पर बैठी चिड़ियों को,

छत की बाउंड्री वाल को,

और फिर, धीरे-धीरे,

सुनहरी धूप में ढके आसमान को।


उसका मन हल्का-सा बेचैन है,

हर धड़कन में प्रेम की नर्मी है,

हर साँस में किसी को पाने की चाहत।

वह सोचती है उसके प्रेमी की मुस्कान,

उसकी आवाज़, उसकी हर अदा,

जो अब उसके दिल की धड़कनों में गूंजती है।


छत की ठंडी ईंटों पर उसके पैरों की हल्की गर्माहट,

धूप की चमक उसके चेहरे पर

और उसकी आँखों की झिलमिलाहट,

सभी मिलकर उसे भीतर से जगाते हैं,

जैसे हर किरण कह रही हो,

“तुम युवा हो, प्रेम में हो, और पूरा होना अभी बाकी है।”


वह मुस्कुराती है,

लेकिन वह मुस्कान चुप है,

अपने भीतर छुपी हुई गहराइयों की तरह।

धूप उसे छूती है,

हवा उसे सहलाती है,

और उसके ख्यालों में वह

आधी हँसी, आधा इंतजार,

और पूरा प्यार संजोए बैठी है।


वह कभी अपने बालों को सुलझाती है,

कभी हल्की-सी सांस लेती है,

और कभी, नज़रें उठाकर,

सपनों की ओर देखती है,

जहाँ उसके प्रेमी की परछाईं

धूप के साथ मिलकर उसे बुलाती है।


और इस तरह, छत पे धूप सेंकती यह युवती

एक पल भी अकेली नहीं है,

क्योंकि उसके भीतर की धड़कनें,

उसके ख्याल, और पहली मोहब्बत की गर्माहट

हर किरण में, हर हवा के झोंके में

उसके साथ खेल रही हैं।


मुकेश ,,,,,,,

No comments:

Post a Comment