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Saturday, 28 February 2026

इंतज़ार की ऋतुएँ

 इंतज़ार की ऋतुएँ

तुम जनवरी में नहीं आईं,

फरवरी भी खामोशी में बीती।

मार्च ने अपना उजाला फैला दिया,

और उम्मीद अब भी धड़कती है—

तुम आओगी, जैसे फागुन हर साल आता है,

बिना शोर, बिना आग्रह, बस अपनी मधुरता के साथ।


मुकेश ,,

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