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Saturday, 21 February 2026

गूगल मैप पर खोया हुआ गाँव

 गूगल मैप पर खोया हुआ गाँव


मैंने उँगली से

स्क्रीन पर अपना गाँव खोजा

नाम टाइप किया,

तो शहरों की भीड़ आ गई,

पर वह नहीं आया

जिसकी गलियों में

मेरी आवाज़ पली थी।


Google के नक़्शे पर

सब कुछ साफ़ दिखता है

हाईवे, मॉल, फ्लाईओवर,

पर कच्ची पगडंडी का

कोई ब्लू-लाइन नहीं होती।


जहाँ कभी

बरगद की छाँव थी,

वहाँ अब सिर्फ़

एक अनाम-सी हरी पट्टी है

जैसे यादों को

ज़ूम करने पर भी

रिज़ॉल्यूशन न मिले।


मैप कहता है

“लोकेशन नॉट फाउंड।”

पर मेरे भीतर

वह अब भी सेव है,

ऑफ़लाइन मोड में।


तालाब का पानी,

मिट्टी की गंध,

साँझ को लौटती गायों की घंटियाँ

इनके लिए कोई सैटेलाइट

कोऑर्डिनेट नहीं देता।


शायद

गाँव कहीं गया नहीं,

बस डिजिटल दुनिया की

परिधि से बाहर हो गया है

जहाँ सिग्नल कमजोर है,

पर स्मृतियाँ फुल नेटवर्क में।


मैंने फोन बंद किया,

आँखें खोलीं

और पाया

कि गूगल मैप पर खोया हुआ गाँव

दरअसल

मेरे ही भीतर

अब भी पिन लगा कर बैठा है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,

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