“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
कूँ-कूँ करता आया टॉमी,
जीभ निकाले आया टॉमी।
टुन्ना ने दिया उसे बिस्कुट,
खुशी से पूँछ हिलाया टॉमी।
दो कूद लगा कर बोला “भौं!”,
जैसे जीता कोई इनाम,
बिस्कुट चट कर चाटे होंठ,
फिर लेटा बनकर श्रीमान
मुकेश ,,,,,,
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