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Monday, 23 February 2026

मास्साब का डंडा

मास्साब का डंडा 

मास्साब का डंडा है,

सीधा जैसे खंभा है।

मेज़ पे जब टिक जाता,

चुप हो जाए झुंडा है।

इसे देख सुधर जाते हम,

छोड़ें सब उत्पात का,

डर थोड़ा, सीख बड़ी —

यही है असली बात का।


छुट्टी की घंटी

छुट्टी की घंटी बजी रे,

टन-टन करती आई रे,

सारी कक्षा हँस पड़ी,

खुशियों की बरसाई रे।

बस्ता कंधे चढ़ जाता,

मन पतंग बन जाता,

कॉपी-किताबें सोतीं फिर,

मैदान हमें बुलाता। 


कल तो इतवार है

कल तो इतवार है,

छुट्टी का वार है,

अलार्म घड़ी भी बोले —

“सोना तुम्हारा अधिकार है!”

ना होमवर्क का डर कोई,

ना मास्साब की फटकार है,

मस्ती ही मस्ती होगी,

क्योंकि कल इतवार है! 


मुकेश ,,,,,,,,,,,


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