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Monday, 23 February 2026

गर्ल्स इंटर कॉलेज के सामने चूरन वाला

 गर्ल्स इंटर कॉलेज के सामने चूरन वाला


गर्ल्स इंटर कॉलेज के सामने

वो रोज़ अपनी छोटी-सी दुनिया सजाता है

काँच की शीशियों में बंद

खट्टे-मीठे राज़।


उसकी आवाज़ में

मिर्च और मिश्री दोनों घुली रहती हैं

“आओ बिटिया… नया मसाला आया है।”


छुट्टी की घंटी बजते ही

सफ़ेद दुपट्टों की बयार चलती है,

और उसकी ठेली के पास

हँसी का मेला लग जाता है।


चूरन की पुड़िया बनाते हुए

वो नमक ऐसे छिड़कता है

जैसे यादों पर स्वाद रख रहा हो।


लड़कियाँ सिक्के बढ़ाती हैं,

और हथेलियों में

खटास का छोटा-सा त्योहार ले जाती हैं।


उसे मालूम है

ये उम्र लौटकर नहीं आती,

पर उसका चूरन

बरसों बाद भी

ज़ुबान पर वही बचपन जगा देगा।


वो बस चूरन नहीं बेचता,

वो हर दिन

किशोर हँसी की थोड़ी-सी मिठास

समय को उधार दे देता है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,

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