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Thursday, 19 February 2026

रेत् के नीचे नीचे नदी बहती है - भाग दस

 रेत् के नीचे नीचे नदी बहती है - भाग दस

 

सूत्रधार और नायिका के सम्बन्ध भी काफी उलझे हुए हैं। 

नायिका सूत्रधार  की बौद्धिक क्षमता और उसके साथ सौम्य संयत और कुछ कुछ शरारती व्यवहार  को पसंद तो करती है,

पर अभी भी सूत्रधार से सब कुछ शेयर करने की मनः स्तिथि में नहीं है,

या कह सकते हो अभी भी नायिका सूत्रधार को इस लायक नहीं समझ पायी कि उससे सामान्य से ज़्यादा बहुत कुछ अंतरंग बातें शेयर की जाएँ। 

वैसे भी स्त्रियां अपने प्रेम और प्रेमी की बातें सात कोटर में छुपा के ही रखना पसंद करती हैं, वे अपने प्यार और उस प्यार के एहसास को जल्दी किसी स्त्री से भी कहना पसंद नहीं करती फिर सूत्रधार तो पुरुष ठहरा और सिर्फ एक साहित्यिक अभिरुचि वाला मित्र ही तो है, हो सकता है विचारों और भावों के स्तर पे कुछ समानता और पसंदगी हो पर अभी इतनी भी नहीं है कि वो सूत्रधार के आगे अपना भूत भविष्य और ह्रदय खोल के रख दे। 

पर, इधर कुछ दिनों की मुलाकातों और बातों से वो सूत्रधार से कुछ-कुछ खुलने सी लगी है.

हो सकता है वजह  उसके जीवन का एकाकी पन हो जिसमे उभर आया एक ऐसा वैकुअम हो  जिसे कोइ विपरीत लिंगी का साहचर्य ही भर सकता है.

खैर ,,,,,

ज़िंदगी भी एक नदी है। 

जन्म से ले कर मृत्यु तक निरंतर बहते जाना जिसकी नियति है 

या कह सकते हो आप।  जैसे नदी अपने दो किनारों के बीच बहती रहती है,

वैसे ही ज़िंदगी की नदी भी भूत और भविष्य दो पाटों के बीच बहती रहती है,

वर्तमान जिसका जल है जो कभी खारा तो  कभी मीठा होता है 

आप ये भी कह सकते हो ज़िंदगी की नदी -सतत - कभी बाधित तो कभी अबाधित बहती ही रहती है 

नायिका की ज़िंदगी भी एक नदी है जिसके दो किनारे हैं, जभी तो सूत्रधार ने उसका नाम "यमी" रख रखा है।  

और फिलहाल सूत्रधार की इस "यमी " के पास ,

एक बीता हुआ कल है  - जिसमे घर की ज़िमींदारियाँ हैं, 

संघर्ष हैं ,पारिवारिक आर्थिक तंगी हैं,

छोटे शहर की दकियानूसी विचारधारें और संकीर्णता है 

पढ़ाई की ज़िम्मेदारियाँ है 

और इन सब के अलावा राजा है 

जो उसका फिलहाल दिल है 

दिमाग है 

साँसे हैं 

एहसास है 

उसका सुख है 

उसका दुःख है 

उसका सब कुछ - सब कुछ है 

उसी सब कुछ यानि की "राजा " 

की कसरती और मज़बूत बाहें दो किनारे हैं 

जिनके बीच वो बहना चाहती है 

हौले - हौले 

मद्धम - मद्धम 

अनवरत ,,,

पर इन सब के मध्य फिलहाल 

उसके पास है एक निचाट एकाकी पन जिसमे उसके दुःख और कष्ट के अलावा उसकी परछाई तक नहीं है अगर है तो,

दूर - दूर तक फ़ैली रेत् है जिसमे बीते हुए दिनों के रेतीले गुबार हैं जिसके नीचे नीचे एक उदासी की एक किसी के प्रेम की चाहत की मीठी - मीठी नदी अभी भी बह रही है जो समंदर में मिलना चाहती हैं.

नदी, यानी नायिका यानी "यमी" जिसे अभी भी समंदर की उम्मीद में है और शायद यही कुछ उसे सूत्रधार में दीखता और नहीं भी दीखता है.

इसी दिखने और न दिखने के उधेड़  बुन में नायिका हौले हौले बहते हुए सूत्रधार के करीब और करीब आ जाती है 

और कभी फिर रास्ता बदल के एकाकी बहने लग जाती है. 

खैर - हमारा विषय फिलहाल नायिका और सूत्रधार के विषय में बात करना नहीं है 

हम चलते हैं 

फिर से राजा वाली घटना के पास 

कल्पना करिये 

राजा बिछड़ चुका है नायिका के घर के बगल से  जा चूका है 

नायिका को ऐसा लगता है 

जैसे छोटे बच्चे से उसके मन पसंद का गुड्डा छुड़वा के कहीं छुपा दिया गया है 

अब वो जोर जोर से रोना चाहती है 

पर रो नहीं पाती 

और अगर रोये भी तो मनाये और चुप कराएगा कौन?

उलटे डांट और मार ज़रूर पड़ सकती है 

वैसे भी घर में फुर्सत किसे है जो नायिका के बारे में सोचे 

पापा की आज कल रात ड्यूटी और दिन सोने में गुज़र जाता है जो थोड़ा मोड़ा वक़्त बचा भी तो 

बच्चो पे चिल्ल पों और घर  और बाहर के तमाम काम 

मम्मी वैसे भी  अपने स्कूल और दुधमुहे बच्चो में इतना उलझी रहती हैं कि दूसरी बातों के लिए फुर्सत कहाँ 

बड़ा भाई पढ़ाई और छोटा भाई दोनों अपनी पढ़ाई - खेल कूद और दोस्तों में मगन 

दुसरे छोटी बहने छोटी ही ठहरी 

बाकी इस राजा वाली बात को लेकर वैसे भी सभी घर वाले नाराज़ हैं 

वो लोग तो कतई इस बात को लेकर कोइ पॉजिटिव सोचेंगे उसके बारे में 

लिहाज़ा  खुद ही रोना है खुद ही चुप होना है 

अपने दुःख को सहना है 

ऐसे में वो  

मन ही मन बीते हुए दिनों और घटनाओ को याद करती है 

अपनी धुन में रहती है 

नतीजा कई बार रोटी, तो कई बार उसकी उंगली गर्म - गर्म तवे से जल जाती है  

और वो छन छना के रह जाती है 

खुद से ही दवाई लगती है 

और खुद ही दर्द सहती है 

हाँ ! अगर ऐसे में राजा होता तो वो ज़रूर दौड़ के खुद उंगली में बरनोल लगाता 

ध्यान से काम करने की हिदायत देता और समझाता देर तक 

इसी बात पे उसे याद आया ,

पिछले ही महीने की तो बात है, वो अपने बड़े भाई की शर्ट की बटन लगा रही थी,

साथ ही राजा से बतिया भी रही थी 

राजा हर वक़्त कुछ न कुछ हंसाने वाली बात ही बोलता रहता 

मज़ाक करता या 

कोइ न कोइ चुटकुला या जोक सुनाता रहता 

और वो खिल्ल - खिल्ल हंसती रहती 

खुश होती रहती 

ऐसे ही उस दिन भी कोइ बात कही थी और वो जोर से हँस पडी थी 

इसी बेध्यानी में सूई उसकी उंगली में चुभ गयी 

और हल्का सा खून निकल आया 

ये देखते ही राजा ने उसकी उंगली पकड़ के अपने मुँह में रख ली 

और एक एक बूँद खून चूस लिया 

वो हतप्रभ थी 

- अरे ये क्या कर रहे हो राजा ??

- कुछ तुम्हारा सारा दर्द मै अपने होठो से पी लेना चाहता हूँ 

ये कह के राजा ठहका मार के हंस दिया था 

वो शरमा गयी थी 

ये तो कहो उस वक़्त कमरे में कोइ नहीं था 

सिवाय एक छोटी बहन के - पर वो इतनी छोटी थी कि उसी कुछ मालूम ही न था क्या हो रहा है 

और वैसे भी वो अपने खिलौनों में मस्त थी, 

वर्ना ये बवाल उसी दिन हो गया होता 

वो ये बात सोच सोच के अभी भी मन ही मन मुस्कुरा दी और 

सोच को आगे बढ़ा दिया 

और ऐसे में उसे ये भी याद आया कल शाम बारिश थी 

ऐसी बारिश में अगर वो हमेशा की तरह छत पे पे कपडे लेने गयी थी और घर भर के ढेर सारे कपडे उतार के ला रही थी 

तब भी राजा हेल्प कर देता - कपडे गीले होने से बच जाते और वो भी सीढ़ियों पे गिरने गिरने से बच जाती 

राजा उसे संभाल लेता 

ये और बात सँभालते संभालते कुछ शरारत कर ही जाता 

पर उसकी ये छोटी मोटी शरारतें उसे भी तो कहें न कहीं अच्छी लगती ही थी 

हालांकि वो बहुत आगे उसे नहीं बढ़ने देती थी 

बहुत मिन्नतें करने के बाद भी 

ये सब सोच सोच नायिका मुस्कुरा रही है 

उसे ये भी याद आया 

राजा होता तो कल कॉलेज का होमवर्क भी अधूरा न होता 

उसे कुछ सामन चौक से लाना था 

अकेले होने की वजह से गयी नहीं थी 

वैसे होता तो वो राजा के साथ स्कूटर से चली गयी होती 

(राजा के पापा के पास स्कूटर थी )

सुबह हो या शाम 

दिन हो या रात 

घर हो कि बाहर 

राजा - राजा - राजा 

नायिका को लगता राजा नहीं तो ज़िंदगी नहीं 

ज़िंदगी में अगर राजा न रहा तो वो भी न रहेगी 

उसने लगभग तय कर लिया था 

पर अब अगर आप सोच रहें होंगे कि 

मै ये बताऊँ  कि उधर 

अपनी रानी से बिछड़ के राजा का क्या हाल है तो आप को इंतज़ार करना पड़ेगा 

वजह शाम हो चुकी है 

और सूत्रधार को सिगरेट की तलब  लगी है 

वैसे भी इधर कई दिनों से सूत्र धार की "यमी " यानी नायिका का न तो कोइ समाचार मिला 

न ही मुलाकात हुई। 

लिहाज़ा सूत्रधार को रह रह के नायिका के ऊपर गुस्सा आ रहा है 


मुकेश इलाहाबादी -----

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