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Saturday, 21 February 2026

सेल्फ़ी के पीछे का खालीपन

 सेल्फ़ी के पीछे का खालीपन


चेहरा बिल्कुल ठीक है

रोशनी सही एंगल से पड़ रही है,

मुस्कान अभ्यास की हुई,

बाल हवा से थोड़ा-सा बिखरे हुए

तस्वीर पर सब कुछ सुंदर है।


उँगली ने स्क्रीन को छुआ,

एक पल में

खुद को फ्रेम में कैद कर लिया।

पीछे की दीवार,

कॉफ़ी का कप,

शाम का आसमान

सब गवाह हैं

कि मैं “खुश” हूँ।


पर

कैमरे की आँख

सिर्फ़ सामने देखती है,

वह यह नहीं जानती

कि तस्वीर के ठीक पीछे

एक लंबी चुप्पी खड़ी है।


लाइक्स की गिनती बढ़ती है,

दिल के निशान चमकते हैं

पर असली दिल

थोड़ा और चुप हो जाता है।

हर “वाह!” के साथ

अंदर का सन्नाटा

एक पायदान और ऊपर चढ़ जाता है।


सेल्फ़ी दरअसल

एक संवाद नहीं,

एक घोषणा है

कि देखो,

मैं यहाँ हूँ।

पर कोई यह नहीं पूछता

कि “तुम किसके साथ हो?”


फिल्टर चेहरे को निखार देता है,

पर थकान की महीन रेखाएँ

अब भी आत्मा पर दर्ज हैं।

तस्वीर में मैं साफ़ दिखता हूँ,

पर भीतर

जगह-जगह धुंध जमा है।


सेल्फ़ी के पीछे का खालीपन

किसी बैकग्राउंड की तरह नहीं,

एक पूरा कमरा है

जहाँ ताली बजाने वाला कोई नहीं,

जहाँ मुस्कान

कैप्शन के साथ पोस्ट तो होती है,

पर लौटकर

अपने ही पास बैठ जाती है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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