बच्चों की करधनी
कमर पर बँधी
चाँदी की छोटी-सी परिधि,
जिसमें समय
घुँघरू बनकर बोलता है।
यह केवल आभूषण नहीं,
लोक-स्मृति का वलय है—
जहाँ देह, ध्वनि और विश्वास
एक साथ निवास करते हैं।
भारतीय परंपरा में
करधनी को
सुरक्षा का वृत माना गया—
नवजात की कोमल देह के चारों ओर
एक धात्विक मंत्र।
कहा गया
चाँदी शीतल है,
ऊर्जा को संतुलित रखती है,
और ध्वनि
नज़र के अदृश्य भय को
दूर भगाती है।
चरक संहिता
में धातुओं की प्रकृति पर विचार है
शीतलता, पवित्रता,
और त्वचा से संवाद की बात।
लोक ने इन्हीं सूत्रों को
अपनी भाषा में ढाल लिया—
करधनी बनाकर।
जब बच्चा
पहला कदम रखता है,
करधनी की रुनझुन
घर को बताती है
चलन शुरू हुआ।
ध्वनि यहाँ
निगरानी भी है,
उत्सव भी।
शोध कहता है
ध्वनियाँ स्मृति गढ़ती हैं;
रुनझुन की नियमित लय
शिशु के तंत्रिका-विकास में
ताल का बीज बोती है।
शरीर और ध्वनि का यह संवाद
पहचान की पहली रेखा है।
पर करधनी का अर्थ
केवल विज्ञान नहीं
यह सामाजिक संकेत भी है।
गाँव की चौपाल से लेकर
आँगन की तुलसी तक,
बच्चे की उपस्थिति
धातु की छोटी-सी आवाज़ में
घोषित होती रही है।
आज जब
प्लास्टिक और मौन के बीच
बाल्यकाल पलता है,
करधनी की रुनझुन
बीते युग की धड़कन-सी लगती है।
बच्चों की करधनी
दरअसल
एक परंपरा का वृत्त है,
जिसमें सुरक्षा, सौंदर्य,
ध्वनि और विश्वास
एक ही कमर पर
बंधे रहते हैं।
और हर रुनझुन में
सभ्यता की एक छोटी-सी
अनुगूँज सुनाई देती है।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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