होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Sunday, 1 March 2026

जब भी आईना देखूँ तेरा अक्स दिखे,

 जब भी आईना देखूँ तेरा अक्स दिखे,

मेरी तन्हाई में तेरी धड़कन सिमटके,

मैं दुनिया से लड़ लूँगा मुस्कुराकर,


तू बस मेरे यक़ीन में बसी रहके।


मुकेश 

No comments:

Post a Comment