“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
रास्ते
सीधे नहीं हैं तुम्हारी तरफ़,
बीच में
समय की कई दीवारें हैं।
फिर भी
एक दिन
किसी मोड़ से मुड़कर
मैं तुम्हारे पास आ जाऊँगा।
तुम
दरवाज़ा बंद मत करना।
मुकेश ,,,,
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