“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
बहुत-सी बातें
अधूरी रह गई हैं, बहुत-से सवाल अब भी रास्ता ढूँढ़ रहे हैं।
मैं लौटूँगा उन सबके जवाब लेकर नहीं, बस तुम्हारे पास बैठने के लिए।
तुम मुझे पहचान लेना।
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