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Sunday, 1 March 2026

हथेलियों की लकीरों में ढूँढता हूँ तेरा घर,

 हथेलियों की लकीरों में ढूँढता हूँ तेरा घर,

बारिश में भीगता हूँ तो लगता है तू इधर,
मैं ठहरा हुआ दरिया हूँ तेरी राह में,
तू मेरी तरफ़ बहती रहना उम्र भर।

मुकेश ,,,,,,,,,

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