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Wednesday, 18 March 2026

तुम्हारे साथ हल्की फुहार में भीगते हुए घूमना हम

 तुम्हारे साथ हल्की फुहार में भीगते हुए घूमना

हम

बिना छतरी के निकले थे

बस यूँ ही,

थोड़ी-सी बारिश में

थोड़ा-सा तुम्हारे साथ होने के लिए।

फुहार हल्की थी,

पर तुम्हारी हँसी

उससे कहीं ज़्यादा भीगी हुई—

जैसे हर बूँद

तुम्हारी आँखों में चमक बनकर उतर रही हो।

तुम चलती रहीं

और मैं

तुम्हारे साथ-साथ

उस बारिश को महसूस करता रहा।

कभी तुम्हारे बालों से

एक बूँद फिसलती,

कभी तुम्हारी हथेली

मेरे हाथ से छू जाती

और उस छोटे-से लम्हे में

पूरी दुनिया

बस उतनी ही रह जाती

जितनी

एक हल्की फुहार में

तुम्हारे साथ

भीगते हुए घूमना।

मुकेश्,,,, 

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