मैं तेरे ख़याल में डूबता हूँ
तो ज़मीन और आसमान के बीच की हर सरहद
धुंधली हो जाती है।
तेरी मौजूदगी का एहसास
मेरे जिस्म में गूंजने लगता है,
जैसे बारिश की पहली बूंद
सूखे तन पर उतर आए।
मैं तुझे छूना नहीं चाहता—
बस महसूस करना चाहता हूँ,
तेरी सांसों का ताप,
तेरे सीने की हलचल,
तेरे बदन से उठती वह ख़ामोश लहर
जो मेरी हर नस में समा जाती है।
तेरी हँसी जब मेरे कंधे से टकराती है,
तो लगता है, मैं खुद से बाहर निकल आया हूँ,
तेरी ओर झुकते-झुकते
किसी अनकहे दिल की इबादत पूरी कर रहा हूँ।
तेरी गर्दन की मोड़ पर
ज़िंदगी ठहर जाती है
मेरा चेहरा तेरे बालों के साए में खो जाता है,
और वक़्त बिना आवाज़ गुज़र जाता है।
मैं अपने होंठों से
तेरे चेहरे का नक्श लिखता हूँ,
हर चुंबन में
तेरे नाम की कोई दुआ बहती है।
मैं यह सब कहता नहीं,
क्योंकि शब्द यहाँ बेमानी हैं
यहाँ सिर्फ़ धड़कनें बोलती हैं,
और इश्क़ खुद अपनी ज़ुबान बन जाता है।
अब जब रात गहरी होती है,
तो मेरी रूह तेरे साये में पिघलती है
तेरी चाहत की तपिश में
मैं फिर से जन्म लेता हूँ,
हर बार तेरी साँसों में।
मुकेश ,,,,,,
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